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Jupiter Juice Mission: एलियंस के लिए अंतरिक्ष में ‘जूस’ भेज रहे वैज्ञानिक, क्या बृहस्पति के चंद्रमा पर मिलेगा जीवन?

वॉशिंगटन: वैज्ञानिक हमेशा से इस सवाल का जवाब खोज रहे हैं कि क्या इस संसार में हम अकेले हैं या पृथ्वी से बाहर कहीं और भी जीवन है? हमारे सौर मंडल में अगर जीवन खोजने की बात कहें तो वैज्ञानिकों का सबसे पहला टार्गेट मंगल ग्रह है। वहीं, दूसरे नंबर पर वैज्ञानिक बृहस्पति और शनि के बर्फीले चंद्रमाओं को जीवन के लिए सबसे उपयुक्त मानते हैं। जीवन की खोज के लिए ही वैज्ञानिक एक नया अंतरिक्ष यान इसी सप्ताह लॉन्च करेंगे। ये अंतरिक्ष यान बृहस्पति ग्रह के चंद्रमा के लिए आठ साल की कठिन यात्रा करेगा। इस स्पेसक्राफ्ट का नाम जूस (Jupiter Icy Moons Explorer-Juice) है।

जूस सैटेलाइट का लॉन्च यूरोप के सबसे बड़े मिशन में से एक हैं। यह अंतरिक्ष यान बृहस्पति और इसके तीन बड़े महासागर वाले चंद्रमाओं कैलिस्टो, गेनीमेड और यूरोपा के करीब से गुजरेगा। जब यह रहस्यमयी दुनिया के करीब पहुंचेगा तो बृहस्पति की भी अपने उपकरण से जांच करेगा। इसके अलावा यह बृहस्पति के चंद्रमाओं पर जीवन होने की संभावना का भी पता लगाएगा। जूस फ्रेंच गुयाना में यूरोप के स्पेसपोर्ट से गुरुवार 13 अप्रैल को लॉन्च किया जाएगा।

6.6 अरब किमी की करेगा यात्रा

इसके बाद यह स्पेसक्राफ्ट साढ़े आठ साल का समय अपने गंतव्य तक पहुंचने में लगाएगा। यह स्पेसक्राफ्ट 6.6 अरब किमी की यात्रा करेगा और 2031 तक बृहस्पति के करीब पहुंचेगा। आम लोग इस स्पेसक्राफ्ट का लॉन्च अंतरिक्ष एजेंसी के यूट्यूब चैनल के माध्यम से भी देख सकते हैं। यह सैटेलाइट 2034 के अंतर में चंद्रमा गेनीमेड की स्थाई कक्षा में प्रवेश करने से पहले तीन चंद्रमाओं के करीब से 35 बार गुजरेगा। यह एक हेयर ड्रायर के बराबर ऊर्जा पर भी चल सकेगा। अपने इलेक्ट्रॉनिक उपरकण को सुरक्षित रखने के लिए इसके पास परमाणु बंकर है।

यूरोपा का वातावरण है कठोर

जूस में 10 उपकरण लगे हैं। इनमें से एक उपकरण को ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने बनाया है। यूके स्पेस एजेंसी में अंतरिक्ष विज्ञान की प्रमुख डॉ कैरोलिन हार्पर ने कहा, ‘जूस हमें सौर मंडल के उस हिस्से में ले जाएगा, जिसके बारे में हम अभी बेहद कम जानते हैं। बृहस्पति के बर्फीले चंद्रमाओं पर पानी हो सकता है।’ बृहस्पति के चंद्रमाओं में यूरोपा ही ऐसा है, जिस पर जीवन होने की सबसे ज्यादा संभावना है। हालांकि जूस इसकी सिर्फ छोटी सी झलक पा सकेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि चंद्रमा के चारों ओर का वातावरण इतना कठोर है कि वह अंतरिक्ष यान को कुछ ही महीनों बर्बाद कर देगा।